अगर मन तेरा पावन हो

मेरी माँ रोज कहती थी, जो अब जज्बात में रहती।
अगर मन तेरा पावन हो तो गंगा परात में रहती।
संभल के बोलना लल्ला, बड़ी ताक़त है बोली में –
गरल तो भर गया सबमें है सुधा भी बात में रहती।।
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– केशव मोहन पाण्डेय

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