अस्तित्व

तुमसे दूर रहकर
कैसे रख सकता
क़ायम
अस्तित्व
मैं अपना,
टूटने पर
माला से
नहीं पहनता
गले में
धागा हीन
मोती कोई।
——-
– केशव मोहन पाण्डेय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *