आन बान शान भरा तिरंगा है ज़िन्दगी

सूर्या अपार्टमेंट मैनेजिंग कमेटी व सर्व भाषा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में गत दिनों सूर्या अपार्टमेंट, द्वारका सेक्टर-6 में स्वतंत्रता दिवस कवि सम्मेलन सह पुस्तक लोकार्पण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री रणधीर सिंह जी थे जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक लव ने किया। कार्यक्रम में श्री इंदर मोहन खन्ना व श्री ए के मलिक विशिष्ट अतिथि थे।
उपर्युक्त कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन व कवि-संगीतकार-गायक श्री सुनील अग्रहरि के मंगलाचरण से हुआ। तदोपरांत अतिथियों को सूर्या अपार्टमेंट मैनेजिंग कमेटी की ओर से ‘स्वतंत्रता दिवस सम्मान’ से सम्मानित किया गया। अपने अध्यक्षीय भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अशोक लव जी ने समाज के लिए साहित्यकारों की भूमिका बताते हुए आये हुए सभी साहित्यकारों व साहित्य-प्रेमियों से सदा तटस्थ साहित्य सर्जना की अपील की। उन्होंने आगे कहा कि देश और समाज के लिए जो भी कदम सकारात्मक है, साहित्यकारों द्वारा उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

मुख्य अतिथि श्री रणधीर सिंह जी ने इस आयोजन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दुहराते हुए आगामी सभी सकारात्मक आयोजनों में अपनी सहभागिता की बात कही। विशिष्ट अतिथि तथा एज वेल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री इंदर मोहन खन्ना जी ने साहित्य के सकारात्मक पहलुओं को उजागर करने तथा समाज को दिशा देने के लिए कलमकारों का आह्वान किया।

अपने स्वागत भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय ने सर्व भाषा के उद्दश्यों को बताते हुए ट्रस्ट के कार्यों को श्रोताओं के सामने रखा। उन्होंने कहा कि लोग भाषा के नाम पर लड़ते हैं, हम भाषा के नाम पर मिलने हैं। हमारी आगामी पत्रिका में भारत के हर दिशाओं का प्रतिनिधित्व हो रहा है। आगामी अंक में पत्रिका में चालीस भाषाओं की रचनाएँ संकलित हैं।

कार्यक्रम के अगले दौर में ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’ द्वारा प्रकाशित तथा केशव मोहन पाण्डेय द्वारा संपादित ‘समवेत’ साझा संकलन का लोकार्पण किया गया। उक्त पुस्तक में दस रचनाकारों की रचनाएँ संकलित हैं। सूर्या अपार्टमेंट मैनेजिंग कमेटी की ओर से सभी रचनाकारों व संपादक को ‘समवेत काव्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सभी रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ भी किया। प्रखर वक्ता, समीक्षक तथा सर्व भाषा ट्रस्ट’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डाॅ. मनोज तिवारी ने पुस्तक पर सारगर्भित व तथ्यपरक समीक्षा प्रस्तुत की।

उपर्युक्त कार्यक्रम के उपरांत आमंत्रित कवियों ने अपनी कविताओं से खूब वाहवाही बटोरी। कवयित्री पम्मी सिंह तृप्ति की कविता से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कवयित्री व अभिनेत्री रोमी शर्मा ने अपनी आज़ादी कविता प्रस्तुत की। युवराज भट्टाराई, अनीता शर्मा, और जियाउल हक के बाद ध्रुव कुमार गुप्ता सुनाया –
था बेंच रहा कटपीस हाथ पर
कोई बनिया दुकान पर।
सरोज सिंह, गुरविंदर सिंह और सूर्य प्रकाश मिश्र के साथ ही सतीश खनगवाल ने प्रस्तुत की –
संसद की परिभाषा
जहाँ बड़े-बड़े दल
जनता के साथ छल।
वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वर्मा ने पेश किया –
तुम कहते हो कि नदी का उफान गायब है
पर किनारे का वो नन्हा मकान गायब है।
संदीप तोमर ने प्रस्तुत किया –
सड़क हमारी
कारें उनकी
संसद में
सरकारें उनकी।
वरिष्ठ साहित्यकार मुकेश नरूला जी ने वृद्धों पर एक कविता प्रस्तुत की –
बड़े-बूढ़े जो होते है
वे घर के शान होते हैं
न हो गर गुफ्गू उनसे
वे बहुत परेशान होते हैं।
सत्य प्रकाश भारद्वाज ने ‘दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं’ प्रस्तुत की, तत्पश्चात लज्जा राम राघव ‘तरुण’ सुनाया –
देश की आबरू पर आँच न आए
कि तय कर लो जो बटे हो धड़ों में।
अनिल शूर ‘आज़ाद’ ने सुनाया कि –
मेरे बाद
जब मैं इस दुबनया में नहीं रहूँगा
कुछ खास नहीं बदलेगा।
इसी क्रम में प्रदीप बंसल ने प्रस्तुत किया –
मेरे आने से पहले
मेरे आजमाने से पहले
सबने आजमाया होगा इवीएम को।
विनिता मल्लिक ने नारी सशक्तिकरण पर एक मैथिली कविता प्रसतुत की। उनके बाद इंदु मिश्र किरण ने एक ग़ज़ल पेश किया –
किया है खेल किसने यह बताओ ज़िंदगानी से
सियासत के खिलाड़ी बच रहे हैं सच बयानी से
चंद्रमणि मणिका ने सुनाया –
वीरों की गाथाएँ सुन
जहाँ शिशु गर्भ में पलते हैं।
किरण सोनी जी ने हास्य की रचना प्रस्तुत की –
कभी आप यहाँ मशहूर थे
सबकी आँखों का नूर थे
सच कहूँ, चश्मे-बद्दूर थे
पर अब, चश्मे बद्धू हो गए हो
सच बता दो –
कहीं टीचर तो नहीं हो गए?
पूजा कौशिक ने देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत रचना प्रस्तुत की –
कितनी निराली दोस्तों
इस बार की राखी
तेरे मेरे दिल जान
हिंदुस्तान की राखी
इस पार की राखी हो या
उस पार की राखी
हर तरह बेमिसाल है
इस बार की राखी
रचना चौधरी के उपरांत तरुणा पुंडीर ‘तरुनिल’ ने पेश किया –
इस बार का पंद्रह अगस्त
नया जोश
नई आज़ादी लाया है।
मधु त्यागी जी की प्रस्तुति के बाद भावना मिलन अरोड़ा ने सुनाया –
चलो बढ़ाएँ हम कदम
प्राचीनता की ओर
महापुरुषों और
वीरों की वीरता की ओर।
तान्या सिंह आदि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया।
कार्यक्रम के अंत में श्री अशोक लव ने सभी की प्रस्तुति पर अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त की तथा सभी आगंतुकों के प्रति समनवयक केशव मोहन पाण्डेय ने आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती श्वेता ने किया।

रिपोर्ट प्रस्तुति – रीता मिश्रा
सचिव, सर्व भाषा ट्रस्ट

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