तेरे-मेरे बीच में

तेरे-मेरे बीच में, ऐसा हो विश्वास।
होकर दूर एक लगें, जैसे भू-आकाश।।1

तेरे-मेरे बीच में, रिश्तों की है गाँठ।
अपनी-अपनी आँख से, दुनिया पढ़ती पाठ।।2

सपने आँखों में लिए, धरती पर हो पाँव।
बसता उसके मन सदा, खुशियों वाला गाँव।।3

चलते रहना काम है, है आराम हराम।
बनते चलने से सदा, सारे बिगड़े काम।।4

सुन्दर सारा जगत है, सुन्दर शशि-दिनमान।
सबसे सुन्दर मनुज है, सकल गुणों की खान।।5
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– केशव मोहन पाण्डेय

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