देश का फ़ौजी

रोटी-सोटी, चाय-चपाती
ये बड़े-बड़ों का खाना है,
अपने लिए तो जल्दी से
मैग्गी-सैगी बनवाना है।
गार्डेन में जा कर मैं झूमूँ
और झूला-झूलूँ खूब
चॉकलेट-टॉफी ऐसे खाता
कि नाक भी जाता डूब।
मैं हूँ बच्चा, मन का सच्चा
नहीं किसी से बैर।
माँ-पापा की उँगली थाम के
करना चाहूँ हरदम सैर।
मम्मी का राजदुलारा हूँ
सबके आँखों का तारा हूँ।
सब कहते हैं जैसा भी हूँ
मैं ही सबसे प्यारा हूँ।
लाल-क़िले पर जाऊँगा मैं
देखूँ लहराता तिरंगा।
देश के दुश्मन को ललकारूँ
कभी जो लेगा पंगा।
मैं आज का बच्चा हूँ
करूँगा अपनी मन-मौजी,
मैं भी बड़ा होकर एकदिन
बनूँगा देश का फ़ौजी।।
————
– केशव मोहन पाण्डेय

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