नयन बीच नित आये वर्षा


नयन बीच नित आये वर्षा
काजल धो के बहाये वर्षा

हर्ष-विषाद दोनों हैं साथी
भाव-सुभाव स्नेह है थाती
सिद्धि-असिद्धि के स्यन्दन चढ़
उमड़-घुमड़ पुनि आये वर्षा।।

गरज गिरा गह्वर से निकले
जैसे हिम हुलस नित पिघले
गर्व राग का कर के अलाप
मन के भाव जगाये वर्षा।।

पीड़ा-कुंठा क्षण में बहाये
स्वच्छ जीवन-राह बनाये
धरा-हृदय का पूजक पागल
क्षण-क्षण सरस जल जाए वर्षा।।

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केशव मोहन पाण्डेय

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