भारत देश महान

जिसके कण-कण बसा हुआ है
ऋषि-मुनियों का ज्ञान
वह है भारत देश महान
वह है अपना देश महान।

जड़-जंगम की महिमा न्यारी
पूजी जाती हैं नदियाँ सारी
पादप-पुहुप में प्रभु बसते हैं
पाहन की प्रभुता है भारी
जिसकी रक्षा में जन्मे यहाँ
अनगिनत भगवान
वह है भारत देश महान
वह है अपना देश महान।

भले उष्णता से तप्त धरा हो
आसमान धरती पे गिरा हो
ठण्ड गलाये अस्थि-पंजर को
उदधि लाख लहरों से भरा हो
भारत माँ के लाल बढ़ाते
निशदिन उसकी शान
वह है भारत देश महान
वह है अपना देश महान।

आपस में चाहे जितना लड़ लें
चाहें जहाँ भी हम मिल बढ़ लें
आँख दिखाये दुश्मन कोई तो
आँख निकाल मुकुट में मढ़ लें
जिसके चरणों में अर्पित कर दें
फक्र से अपनी जान।
वह है भारत देश महान।
वह है अपना देश महान।

हिमगिरि सा उत्तुंग हो मस्तक
चाह के दुश्मन करे न दस्तक
करे जो कोई पागल कभी भी
हरेक- बच्चा बनेगा भक्षक
आर्यावर्त की यहीं परिपाटी
सुन ले सकल जहान।
वह है भारत देश महान।
वह है अपना देश महान।
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– केशव मोहन पाण्डेय

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