मुबारक हो सबको नया साल

अधर पर रहे अक्षय मुस्कान
नयन में चहक भरा हो बिहान
रहे न अब कोई खस्ता हाल।
मुबारक हो सबको नया साल।।
रोटी हो सबको उपलब्ध
हृदय सबका सबसे संबद्ध
प्रीति की सरिता सभी बहायें
सभी से विनती करूँ करबद्ध
द्वेष हिंसा है नहीं निदान
करें सब इसका मिल समाधान
नहीं हो किसी से किसी को मलाल।
मुबारक हो सबको नया साल।।
ऊर्वरा बढ़े धरती का रोज
सभी रहें उत्सुक देने को भोज
हो कैसे भारत का उत्थान
करें सब मिलजुल के ये खोज
मिटे जगती का रेगिस्तान
हर्षित रहें सारे बागवान
अंकुरण फूटे हर एक डाल।
मुबारक हो सबको नया साल।।
एकता ही धरती का मूल
नहीं बोये कोई कभी भी शूल
सब हैं एक, एक समान
करें अब तो सब मिल के कुबूल
रोटी कपड़ा और मकान
इससे अलग का सब व्यवधान
हो ऐसा ही हर घर का हाल।
मुबारक हो सबको नया साल।।
——–
– केशव मोहन पाण्डेय

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