मेरे गाँव की धरती

मेरे गाँव की धरती देती
तरह-तरह के फूल।।
कुछ हैं लंबे, कुछ हैं नाटे
सोंधी मिट्टी से खुशबू बाँटे
हरे पत्ते में कुछ हैं नीले
रंग-रंगीले बैजनी सजीले
मोटी-पतली पंखुड़ी वाले
कुछ में हैं तीखे शूल।
मेरे गाँव की धरती देती
तरह-तरह के फूल।।
फूल सुहाने अनुबंध लिए हैं
छोटे हैं पर सुगंध लिए हैं
इतराते हैं डाल-डाल पर
अच्छे बूरे सभी हाल पर
फैले खेत में दूर तलक हैं
मन मोहते समूल।
मेरे गाँव की धरती देती
तरह-तरह के फूल।।
गंधहीन कुछ, पर मतवाले
कुछ हैं चटक भी सब्जी वाले
दंभहीन पर दर्प लिए हैं
कुछ तो सुरभित अर्क लिए हैं
कुछ हैं झूमते लता  बल्लरी
झाड़ के सारा धूल।
मेरे गाँव की धरती देती
तरह-तरह के फूल।।
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-केशव मोहन पाण्डेय

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