मेरे लिए खास हरदम हो

मेरा आभास हरदम ही, मेरे लिए खास हरदम हो
हवाओं में फ़िज़ाओं में अलग एहसास हरदम हो
ज़िन्दगी में बँधी है डोर जबसे अपने ज़ज़्बातों की
तुम मेरी साँस हरदम हो, मेरा विश्वास हरदम हो।
***** केशव मोहन पाण्डेय *****

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