मोहे दरश करा दो मोहन

मोहे दरश करा दो मोहन।
निज प्रतिबिम्ब दिखा दो प्यारे, मेरे मन के मुकुरन।।
मोहे दरश करा दो मोहन।

मेरे मन के प्रेम लहर में अंग-अंग डूब जाये
तुम ही कहो जग याद करूँ कैसे, जो तू ही रूठ जाये
श्याम-सलोने सुरतिया पर, वारूँ शत-शत जीवन।।
मोहे दरश करा दो मोहन।

कर कृपा मुझपर हे मालिक एक दिन मेरी सुधि ले लो
दया-दृष्टि देकर दुःख दर दो, ऐसे ना आस से खेलो
दरश को तरसे दुखिया अँखियाँ, रोता है मन मधुबन।।
मोहे दरश करा दो मोहन।

बाँकी नयन अदा बाँकी पर, सरल स्वरूप तुम्हारा
कंठ का स्वर, नैनों की ज्योति ने छोड़ा साथ हमारा
चरण में अपने शरण दे करके चमका दो मेरा भुवन।।
मोहे दरश करा दो मोहन।
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– केशव मोहन पाण्डेय

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