रोटी

मन
रोटी नहीं माँगता
रोटी के बहाने
माँगता है
चैन
और
सिर्फ
उसी चैन के लिए
सब
आजीवन
रहते हैं
बेचैन।
——
– केशव मोहन पाण्डेय

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