सबकी सुनते हैं भगवान शिव

आज महाशिवरात्रि है। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान् शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। कहा जाता है कि भोलेशंकर राम नाम के रसिक हैं। शमशान घाट एवं वहाँ जलने वाले मुर्दे की भस्म को शरीर में धारण करने वाले भोलेशंकर पूर्ण निर्विकारी हैं। उन्हें विकारी मनुष्य पसंद नहीं हैं। कहा यह भी जाता है कि मृत्यु के उपरांत शव को जलाया जाता है, तो जलने के बाद मुर्दे की भस्म में किसी भी प्रकार का विकार नहीं रहता। मनुष्य के सारे अहंकार तन के साथ जलकर भस्म हो जाते हैं। तब भोलेनाथ उस र्निविकारी भस्म को अपने तन में लगाते हैं।

भगवान शिव और महाशिवरात्रि से संबंधित अनेक कथाएँ प्रचलित है। कहते हैं कि महाशिवरात्रि में किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की आराधना की जाए, तो माँ पार्वती और भोले त्रिपुरारी सबकी सुनकर उनकी कामनाएँ पूरी करते हैं। यह भी कहा जाता है कि प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया। विश्वास किया जाता है कि तीनों लोकों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरी को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों और पिशाचों से घिरे रहते हैं। उनका रूप बड़ा अजीब है। शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकार ज्वाला भोले भंडारी की पहचान है।

बैल को वाहन के रूप में स्वीकार करने वाले शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं। यह दिन जीव मात्र के लिए महान उपलब्धि प्राप्त करने का दिन भी है। बताया जाता है कि जो लोग इस दिन परम सिद्धिदायक उस महान स्वरूप की उपासना करता है, वह परम भाग्यशाली होता है। मंगल की मूर्ति भगवान शिव की महत्ता के विषय में बताया गया है कि विविध शक्तियाँ, विष्णु व ब्रह्मा, जिसके कारण देवी और देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं, ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को नमस्कार है। भगवान शिव के विषय में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘नटराजम्’ में कहा गया है कि भगवान शिव अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं तथा कुछ भी देना शेष नहीं रखते हैं। इसमें बताया गया है कि ‘त्रिपथगामिनी’ गंगा, जिनकी जटा में शरण और विश्राम पाती हैं, त्रिलोक- आकाश, पाताल व मृत्युलोक वासियों के त्रिकाल यानी भूत, भविष्य व वर्तमान को जिनके त्रिनेत्र त्रिगुणात्मक बनाते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्त बड़े धूमधाम से शिव की पूजा करते हैं। भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बेल-पत्र आदि चढ़ाकर पूजन करते हैं। आज के दिन भक्त उपवास करते हैं। रात को जागरण करते हैं। शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है। यह माना जाता है कि इस दिन शिव का विवाह हुआ था, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है। वास्तव में शिवरात्रि का परम पर्व स्वयं परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री-पुरुष, बालक, युवा और वृद्ध सभी इस व्रत को कर सकते हैं। इस व्रत के विधान में सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उपवास रखा जाता है।
माना जाता है कि इस दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए। रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ सुनना हरेक व्रती का धर्म माना गया है। इसके बाद अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है। माना जाता है कि यह दिन भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है। यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है। इस व्रत को करने से सब पापों का नाश हो जाता है। हिंसक प्रवृत्ति बदल जाती है। निरीह जीवों के प्रति आपके मन में दया भाव उपजता है। यह भी कहा जाता है कि सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजन-आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए। सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन संपन्न होता है। उसके बाद दिन में ब्रह्मभोज भंडारा के द्वारा प्रसाद वितरण कर व्रत संपन्न होता है।

शिव को महादेव इसलिए कहा गया है कि वे देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, किन्नर, गंधर्व पशु-पक्षी व समस्त वनस्पति जगत के भी स्वामी हैं। शिव का एक अर्थ कल्याणकारी भी है। शिव की अराधना से संपूर्ण सृष्टि में अनुशासन, समन्वय और प्रेम भक्ति का संचार होने लगता है। शिव और शक्ति का सम्मिलित स्वरूप हमारी संस्कृति के विभिन्न आयामों का प्रदर्शक है। हमारे अधिकांश पर्व शिव-पार्वती को समर्पित हैं। शिव औघड़दानी हैं और सहज स्वभाव से सबकी सुनते हैं।
आप भी सपरिवार शिव की आराध्धना कीजिए। उदार मन वाले वे भोल-भंडारी सारी पीड़ाओं को दूर करेंगे और सुख-शांति भरपूर करेंगे।
——
– केशव मोहन पाण्डेय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *