सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा चौथी ऑनलाइन कवि गोष्ठी का आयोजन


रविवार की शाम को 6.30 से 7:50 तक सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा चौथी ऑनलाइन कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी केवल भोजपुरी भाषा के लिए समर्पित थी। गोष्ठी की अध्यक्षता सर्व भाषा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अशोक लव ने किया तथा संचालन ट्रस्ट के समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय ने किया। कवि गोष्ठी में देश के विभिन्न अंचलों, अहमदाबाद, दिल्ली, गोरखपुर, कुशीनगर, गाज़ियाबाद, तिनसुकिया (असम), सिवान, वाराणसी के अतिरिक्त सऊदी अरब से साहित्यकारों से भाग लिया।
ऑनलाइन भोजपुरी कवि-गोष्ठी की शुरुआत गोष्ठी के निवेदक और भोजपुरी साहित्य सरिता के संपादक तथा इस गोष्ठी के निवेदक जयशंकर प्रसाद द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात सिवान से जुड़े कवि प्रेम नाथ मिश्र ने किसान-केंद्रित अपनी रचना ‘विधना खेती कइला में बहुत परेशानी हो गइल’ प्रस्तुत की। अहमदाबाद बाद से जुड़े विकास मिश्रा के कोरोना महामारी पर केंद्रित एक हास्य कविता के उपरांत सऊदी अरब से ऑनलाइन हुए कवि गणेश नाथ तिवारी ने ‘बेटी बचाई आ बेटी पढाई’ की बेहतरीन प्रस्तुति से सबको आनंदित किया।

तिनसुकिया, असम से जुड़े दिलीप पैनाली जी ने ‘चलीं जरावे दियना एगो अमर शहीद के नाव के’ प्रस्तुत कर के गोष्ठी को भावात्मक मोड़ दिया। उनके बाद दिल्ली की कवयित्री और ग़ज़लगो इंदु मिश्रा ‘किरण’ जी ने ‘हृदय के पृष्ठ पर हम त हमेशा प्यार लिखी ला’ प्रस्तुत किया। वही ग़ाज़ियाबाद की कवयित्री सरोज त्यागी जी वर्तमान परिवेश की व्याख्या करते हुए ‘एक दूजे के हई जा सहारा पीया’ प्रस्तुत कर के अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
गोष्ठी के अगले क्रम में ग़ाज़ियाबाद से जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ने ‘बेगर बात के बात’ प्रस्तुत कर के सामाजिक संरचना को बखूबी उकेरा तो वाराणसी से जुड़े युवा कवी रत्नेश तिवारी चंचल ने लॉकडाउन में काशी की स्थिति को ‘मस्त शहर अलमस्त नगर’ से चित्रित किया। दिल्ली से युवा कवि शशि रंजन मिश्र ने अपनी कविता ‘बैसाख नंदन’ से सबको गुदगुदाया और घाटशिला, झारखंड की कवयित्री डॉ रजनी रंजन जी की सुमधुर और समसामयिक गीत ‘घरवा बनल जेलखाना मन पुजारी जोगिया’ के उपरांत सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय ने राधा छंद के उपरांत ‘सीना तान करे सेवकइया हो रामा’ प्रस्तुत कर के कोरोना काल की दशा का वर्णन किया। अंतिम कवी के रूप में गोरखपुर से जुड़े कुमार अभिनीत जी ने अपनी रचना ‘माटी के भगवान’ से गोष्ठी को ऊँचाई प्रदान की।

गोष्ठी के अंत में अध्यक्षता कर रहे सर्व भाषा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अशोक लव ने सभी कवियों को इस सुन्दर आयोजन में सम्मिलित होने के लिए धन्यवाद दिया और निरंतर रचनाशील रहकर इस कोरोना काल को मात देने के लिए प्रेरित किया।
गोष्ठी में कुशीनगर से कवी आकाश महेशपुरी भी जुड़े रहे। कार्यक्रम के अंत में इंदु मिश्रा ‘किरण’ ने सभी आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रस्तुति : रीता मिश्रा

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