सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा ‘हिन्दी दिवस समारोह’ का आयोजन

साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध संस्था ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’ द्वारा 14 सितम्बर को श्री हंस सरस्वती पुस्तकालय, राजनगर पार्ट – एक, पालम, नई दिल्ली में ‘हिन्दी दिवस समारोह’ का आयोजन किया गया । यूं कहें कि उक्त कार्यक्रम से ही संस्था कि गतिविधियों की शुरुआत की गई जिसमे एक परिचर्चा व कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया । उक्त अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष व श्रेष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक लव ने कार्यक्रम कि अध्यक्षता करते हुये कहा कि सबको अपनी भाषा को बचाने और बढ़ाने का अधिकार है । इस न्यास कि शुरुआत का मुख्य उद्देश्य यही है कि देश-विदेश के सभी भाषा-प्रेमियों व सेवकों को एक साथ जोड़ा जाय ।

कार्यक्रम का प्रारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर अतिथियों व आगंतुक कवियों द्वारा माल्यार्पण और विदुषी कवयित्रि व रंगकर्मी वीणा वादिनी चौबे द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से किया गया। उसके उपरांत पुस्तकालय के संचालक श्री योगेश अग्रवाल जी ने आगंतुकों का शाब्दिक स्वागत किया। अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने आगंतुकों को पुष्प-माल पहनाकर स्वागत किया। हिन्दी दिवस समारोह कि अध्यक्षता डॉ अशोक लव ने की, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार और अवकाशप्राप्त शिक्षा निदेशक श्री अनिल उपाध्याय जी मुख्य अतिथि और गाजियाबाद से पधारे साहित्यकार श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी विशिष्ट अतिथि थे । गोष्ठी में बीज वक्तव्य देते हुये डॉ अशोक लव ने ट्रस्ट की कल्पना और भाषा की महत्ता पर अपना विचार देते हुये कहा कि सबको अपनी भाषा को बचाने और बढ़ाने का अधिकार है । इस न्यास कि शुरुआत का मुख्य उद्देश्य यही है कि देश-विदेश के सभी, भाषा-प्रेमियों व सेवकों को एक साथ जोड़ा जाय । भाषा ही अपनी पहचान होती है । किसी को देखकर नहीं पता चलता कि वह गुजराती है या पंजाबी या हरियाणवी, मगर उसे उसकी पहचान भाषा ही दिलाती है।

युवा साहित्यकार केशव मोहन पाण्डेय ने अपना विचार व्यक्त करते कहा कि भाषा और माँ में कोई अधिक भेद नहीं है । दोनों व्यक्ति को पालती हैं, उसे उसकी पहचान देती हैं। जो अपनी माँ से प्यार करता है, वह दूसरे की माँ को गाली नहीं दे सकता, उसी तरह जो अपनी भाषा का आदर करता है, वह दूसरों कि भाषा का भी अनादर नहीं करेगा । नवजागरण प्रकाशन के संचालक राजकुमार अनुरागी ने भाषा के महत्त्व और अपनी प्रकाशकीय योजनाओं का जिक्र किया और ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए अपनी शुभकामनायें व्यक्त की। अगले वक्ता के रूप में संतोष पटेल जी ने अनेक उदाहरणों द्वारा भाषा और विशेषकर मातृभाषा के विकास पर ज़ोर दिया। जलज कुमार अनुपम ने इतिहास और वर्तमान स्वरूपों का हवाला देते हुये अपने जीवन में हिन्दी और अपनी मातृभाषा भोजपुरी के महत्त्व को बताया ।   

समारोह में अगली कड़ी के रूप में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया था । श्री अनिल उपाध्याय जी ने ‘यदि मुझमें इतनी आग न होती’ गीत प्रस्तुत कर के गोष्ठी की शानदार शुरुआत की । उनके उपरांत जलज कुमार अनुपम से ‘अर्धांगिनी’ कविता प्रस्तुत कर के गोष्ठी को एक नई ऊंचाई देते हुये श्रोताओं को खूब रिझाया । अगले कवि के रूप में हिन्दी-भोजपुरी के कवि संतोष पटेल जी ने ‘मुस्कुराकर देख लो, पत्थर में प्राण आ जाएगा’ गाकर युवा श्रोताओं को आनंदित किया। कार्यक्रम में  गाजियाबाद से पधारे कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी ने भोजपुरी में ‘हिन्दी’ पर कविता प्रस्तुत कर के यह सिद्ध कर दिया कि भावनाएं भाषा में सीमित नहीं हैं । भाषा कोई भी हो, सबके अंदर एक-दूसरे के प्रति लगाव ही होता है । समारोह में पधारी प्रसिद्ध रंगकर्मी और कवयित्रि श्रीमती वीणा वादिनी चौबे ने नारी सशक्तिकरण पर गीत प्रस्तुत करते हुये अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई । कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे युवा साहित्यकार केशव मोहन पाण्डेय ने ‘माँ और मेरी भूमिका’ कविता प्रस्तुत की । उनकी प्रस्तुति आज की संवेदना-शून्य संतानों को जहाँ ललकारती नजर आई, वहीं माँ के प्रति उनकी भूमिका को भी भावुकता के साथ उकेरती दिखी । युवा कवि मुकेश कुमार संतोष ने अपनी कोमल भावनाओं को शब्दों में पिरोकर सुंदर मनका तैयार किया । समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ अशोक लव ने ‘माँ की चिट्ठी’ नामक कविता से माँ की संवेदनात्मक दिल का बहुत ही भावात्मक तरीके से प्रस्तुत करते हुये आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया ।  

सर्व भाषा ट्रस्ट के पहले कार्यक्रम में ही करीब चौतीस युवा/युवतियों ने ट्रस्ट की सदस्यता ली । सबने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली के अनुसार हर स्तर पर अपना योगदान देने का प्रण किया ।

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