सुन्दर दिन-रात

फूल फूल सुन्दर लगे, सुन्दर डाल व पात।
मन में खुशियाँ हो भरी, तो सुन्दर दिन-रात।। 1

ठहरे जल का मोल क्या, बहता पाये मान।
चलने वाले का सदा, होता रहा जहान।। 2

पत्थर गिरा पहाड़ से, तेज नुकीला रूप।
घिसते-घिसते हो चला, चिकना चारु स्वरुप।।3

एक पत्र का मोल क्या, जो अलग तना, शाख।
अलग-अलग जो हो गए, मिल जाते सब राख।।4

पादप पंखुड़ी पुहुप, प्रीति रीति अनमोल।
मौन-मौन ही गंध दे, बोले न कभी बोल।। 5
—– केशव मोहन पाण्डेय

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