हिंदी से कैसा द्वेष?

राग-रंग की भाषा हिंदी
सक्षम-अक्षम की आशा हिंदी
हिंदी सबकी शान है
हिंदी से हिन्दुस्तान है
मेरे गाने से क्योंकर क्लेश है?

हिंदी फैली दूर तलक
ईर्ष्या -द्वेष क्यों नाहक
इसका अपना इतिहास पुरातन
पूजता रहता इसको जन-मन
विस्मित सारा परिवेश है।

हिंदी ने किसी से बैर न माना
जो आया उसे अपना जाना
सबको भाई-बंधू जानती
रंग-रूप का भेद न मानती
इसकी विशेषता ये विशेष है।
हिंदी से कैसा द्वेष है?

केशव मोहन पाण्डेय

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