हे माँ शारदे!

हे माँ शारदे! एक वर दे तू।
अंध हृदय में ज्योति कर दे तू।।

अगम अगोचर महिमा तेरी
मैं खल कामी दुःख की ढेरी
देरी करो ना विद्या दायिनी
दुःख दरद सारी दर दे तू।।

अमल कमल सा मेरा मन हो
सहज सदाचारी जीवन हो
मन हो कभी कलुष से आकुल
कलुष सदा मेरा हर दे तू।।

रस-छंद-बंधन मैं नहीं जानूँ
तेरे समक्ष माता जिद्द ठानूं
मानूँ कि कुछ अच्छा लिख लूँगा
कल्पना का अक्षय पर दे तू।।

शाश्वत सुर सबमे माँ बहा दो
भारत भूमि का गीत सुना दो
सजा दो सुफल की सरगम माता
वरद हस्त रख सिर पर दे तू।।
—केशव मोहन पाण्डेय—

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *