मैं सूरज हूँ

कुण्ठा का कोहरा अज्ञानता का अंधकार पैबंदों के विचार और कूप-मुडुकी संसार में सूरज आते ही प्रकाश भर जाता है – मैं सूरज हूँ। मैं वह सूरज हूँ जिसे नहीं ढका जा सकता किसी गुट के बादल से नहीं बंद किया जा सकता चाशनी-युक्त संकीर्णता के डिब्बे में और ओढ़ाकर सम्मानों का चादर घेरा भी तो नहीं जा सकता किसी लक्ष्मण-रेखा से किसी रावण द्वारा हरण भी नहीं हो सकते मेरे विचार और कौन कस…

"मैं सूरज हूँ"

जनम लिहले कन्हैया

जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल झुमेला नगरिया नू हो।। गरजि-चमकि मेघ बरसेले दरस के तरसेले मनवा में हरसे नू हो। अरे माई, जुग-जुग जियें नंदलाल कि आँखि के पुतरिया नू हो।। देखि के जमुना धधा गइली अउरी अगरा गइली कान्ह…

"जनम लिहले कन्हैया"

प्रकृति के परिवर्तन का पर्व मकर-संक्रांति

खिचड़ी खाने में कभी पेट को हानि नहीं उठाना पड़ता है। इससे हल्का भोजन शायद ही कुछ हो। यह एक लोकप्रिय भारतीय व्यंजन है जो दाल तथा चावल को एक साथ उबाल कर तैयार किया जाता है। इसमें हमारी माई स्वादानुसार और आइटम भी डालती थीं। यह पेट के रोगियों के लिये विशेष रूप से उपयोगी है। यह तो इसका पाचकीय और औषधीय गुण हुआ, मगर भारतीय समाज की विराटता की दृष्टि से देखा जाय…

"प्रकृति के परिवर्तन का पर्व मकर-संक्रांति"