बाक़ी जग वाले कह लेंगे

   सजग चेतना वालों में सिसृक्षा का बीज बोने के लिए निरंतर तत्पर श्री आर. डी. एन. श्रीवास्तव अर्थात रूद्र देव नारायण श्रीवास्तव का जन्म 10 दिसंबर 1939 को ग्राम बैरिया, नन्दा छपरा, रामकोला, जनपद कुशीनगर में हुआ। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम. ए. किया परन्तु रचनाएँ हिंदी में करने लगे। उन्होंने लोकमान्य इंटर कालेज, सेवरही से प्रधानाचार्य पद से अवकाश लिया है। उनकी रचनाओं की धार बहुत ही तीक्ष्ण होती हैं। वे अपने अंदाज़…

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समय के साथ कदम मिलाती हिंदी

     समाजशास्त्र के अनुसार गतिशीलता से अभिप्राय व्यक्ति का एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने से होता है। जीवविज्ञान में ऊर्जा का प्रयोग करके स्वयं को जगह-से-जगह हिला पाने की क्षमता को गतिशीलता कहते हैं। जब एक स्थान से व्यक्ति दूसरे स्थान को जाता है तो उसे हम साधारणतया आम बोलचाल की भाषा में गतिशील होने की क्रिया मानते हैं। जीवन के रूप में हम जिसे भी जानते हैं, उसमें गति निहित है।…

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गुरदयाल सिंह का साहित्य जीवन-संघर्ष का उपन्यास

                                         पंजाबी साहित्यकार गुरदयाल सिंह से मेरा परिचय बहुत पुराना नहीं है। जब मैं हिंदी शिक्षण करने लगा तब उनकी संस्मरणात्मक कथा ‘सपनों के से दिन’ के माध्यम से उनके साहित्यकार रूप से मिला। मिला तो वे अपने लगने लगे। अपने लगे तो कभी लगा ही नहीं कि वे पंजाबी लेखक हैं। अपनी इस बात की…

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मेरा गाँव बदल गया है 

  लगभग तीन-चार साल बाद अपने गाँव, अपने जन्म-स्थान जाने का अवसर प्राप्त हुआ। निर्णय यह हुआ कि इस बार हम साइकिल से चलेंगे। मेरा वजन अब पहले जैसा नहीं रहा। 55 किलो की सीमा पार करके 75-80 किलो का भारी-भरकम बंदा हो गया हूँ। मेरे पास पैंडिल-मार द्विचक्र वाहिनी (साइकिल) तो है नहीं, तथा गाँव के सौंदर्य और ममत्व भरे मिट्टी में द्वेष और तिकड़म का घिनौना रूप देखा हूँ, तो कोई अधिक रुचि…

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प्रकृति के परिवर्तन का पर्व मकर-संक्रांति

खिचड़ी खाने में कभी पेट को हानि नहीं उठाना पड़ता है। इससे हल्का भोजन शायद ही कुछ हो। यह एक लोकप्रिय भारतीय व्यंजन है जो दाल तथा चावल को एक साथ उबाल कर तैयार किया जाता है। इसमें हमारी माई स्वादानुसार और आइटम भी डालती थीं। यह पेट के रोगियों के लिये विशेष रूप से उपयोगी है। यह तो इसका पाचकीय और औषधीय गुण हुआ, मगर भारतीय समाज की विराटता की दृष्टि से देखा जाय…

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