प्यार की चाहत

सविता दिखने में बहुत सामान्य थी और उसके पति रवि हर प्रकार से आकर्षक। आई टी प्रोफेशनल होने के कारण व्यक्तित्व और वेतन, दोनों आकर्षक था। रवि के पास सबकुछ होने के बाद भी समय का अभाव था। रवि की दिनचर्या भाग-दौड़ की थी। परिवार को व्यक्तित्व और वेतन से अधिक समय की इच्छा होती है। रवि के इस जीवन से सविता ने अनुभव किया कि ‘वह उसे प्यार नहीं करता। हो न हो, उसकी…

"प्यार की चाहत"

प्यार का रंग

उसकी साँवली सूरत भी बेहद आकर्षक थी। प्रौढ़ावस्था में भी उसके चेहरे के पानी से यौवन का आकर्षण सहज ही समझा जा सकता था। साँवले रंग पर गोल पानीदार लुभावना चेहरा। चेहरे के लुभावनेपन का तीन कारण था। होठों पर अक्षय मुस्कुराहट। बड़ी-बड़ी काली आँखें। आँखों की अस्थिरता। कद-काठी ऊँची नहीं थी, पर शरीर भारी हो गया था। अपनी ही धून में चलती और नजर मिलने पर दो-चार पावन मुस्कुराहट छिड़क देती। सरोज अपने काम…

"प्यार का रंग"

संस्कारहीन

‘यह बात तो एकदम सही है कि बेटी को सिर पर चढ़ाओगे तो कभी सिर उठाने के लायक नहीं रहोगे।’ ‘आप सच कह रह हैं बहन जी। लड़की का मान-सम्मान उसके हर रूप में, हर क्रिया-कलाप में देखा जाता है।’ ‘देखी हो सरला की फोटो? …. जब माँ इस उम्र में अपनी हया खोकर काया दिखाने में लगी है, तो बेटी तो भाई आज के जमाने की ही है। …. जब माँ ही अपना ही…

"संस्कारहीन"

पग-बाधा

आज अपार ने सोशल साइट पर एक पोस्ट देखा, – ‘पहले बाल-विवाह होता था अब बाल-प्रेम होता है।’ पोस्ट एक समूह के एडमिन द्वारा किया गया था। अपार साहित्य का विद्यार्थी था। साहित्य से अनुराग था। पढ़ता तो था ही, लिखने का भी शौक पकड़ा था। जब उससे उसकी मित्र-मंडली या साहित्य प्रेमी उसकी लेखनी की प्रंशसा करता तो बहुत नम्रता से कहता मैं तो अभी सीख रहा हूँ। यह कहते ही उसका सिर झुक…

"पग-बाधा"

वैराग्य

न्यू हाॅस्पिटल में सौरभ का आज चौथा दिन है। वह अपने पापा जनक के साथ आया है। जनक विगत चार महिने से बीमार चल रहे हैं। पहले बुखार था। अपने फैमिली डाॅक्टर को दिखाया। बीमारी की गंभीरता और उपकरणों के अभाव के कारण ठीक से परीक्षण और पहचान नहीं की जा सकी। अनुपयुक्त दवा दिए जाने के कारण बुखार को रोका न जा सका। डाॅक्टर जवाब भी नहीं दे रहा था। फैमिली डाॅक्टरों की यही…

"वैराग्य"

अम्मा

बहुत पुरानी कहावत है कि पूत कपूत हो सकता है, माता कुमाता नहीं हो सकती। कहते हैं कि माँ का हृदय दुष्टता से दूर होता है। जिस स्त्री का मन दुष्प्रवृति से भर जाए वह माँ हो ही नहीं सकती। माँ तो चिलचिलाती जेठ की दोपहरी में अपने पल्लू से माथे पर छाया कर के स्कूल से आने वाली डगर को एकटक देखती रहती है। माँ तो आम के बगीचे में कैरियाँ बटोरने वालों में…

"अम्मा"

प्यार का शोध-पत्र

‘प्यार एक अहसास है। अनेक भावनाओं का मिश्रण है। प्यार पारस्परिक स्नेह से लेकर खुशी की ओर विस्तारित है। प्यार एक मजबूत आकर्षण है। निजी जुड़ाव की भावना है। प्यार को दया, भावना और स्नेह प्रस्तुत करने का तरीका भी माना जा सकता है। स्वयं के प्रति या किसी जानवर के प्रति या किसी व्यक्ति के प्रति स्नेहपूर्वक कार्य करने या जताने को प्यार कह सकते हैं। कहते हैं कि अगर प्यार होता है तो…

"प्यार का शोध-पत्र"

घर के भीतर घर

कामकाजी पुरुष घर का हाल रिटायर्ड होने पर ही समझ्ा पाता है। यशोधन बाबू भी वैसे ही जीव थे। जब उनका सानिध्य मिला तब मेरी धारणा और दृढ़ हो गई। यशोधन बाबू के अनुज सुयोधन इसी महानगर के दफ्तर में सचिव हैं। अच्छी कमाई है। नीचे की भी, ऊपर की भी। संयोग इतना अच्छा कि झ्ाूठ बोलने की समस्या ही नहीं आती। बड़े-बड़े लोग भी शीघ्रता से अपना काम कराने के लिए बड़ी याचना और…

"घर के भीतर घर"

बस मुड़ गई

आँख खुली तो खिड़की से देखा, सड़क के दोनों तरफ ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ, उलझे-सुलझे नाले, छोटी-बड़ी झाड़ियाँ। झाड़ियों में खिले रंग-बिरंगे फूल, मानों प्रकृति-रानी के वस्त्र के बेल-बूटे हों। नालों में उछलता-कूदता पानी अपनी मस्ती में मग्न था। उसपर सूर्य की पहली किरण आकर वियोग के बाद का प्यार बरसा रही थी। मेरे लिए यह दृश्य पहला था। घूमने का अनुभव पहला था। इतनी लंबी यात्रा पहली थी। शायद इसीलिए मुझे यह सब स्वर्गिक सुख सा…

"बस मुड़ गई"