ऐसा मेरा प्यार

(दौहिक गीतिका) बाँध मत किसी बाँध से, रोक न मेरी धार। समय कभी सहला ज़रा, कर कठोर प्रहार।। चलना मेरा काम है, करना क्या आराम। चाहे जितना भी बढ़े, धरती का विस्तार।। कहने वाले कह रहे, मुझमे भरा घमंड। देखो दर्पण में जरा, खुद को भी तो यार।। मेरी दुनिया तुम सदा, मान या नहीं मान। मानेंगे इक दिन सभी, रहना तुम तैयार।। आँखों में तेरी छवी, मन में तेरा चित्र। साँसों का संगीत तुम,…

"ऐसा मेरा प्यार"

पूजा तेरे रूप की

(दौहिक गीतिका) चाहे कितना भी रखो, फूँक-फूँक के पाँव। बने खिलाड़ी खेलते, सारे अपना दाँव।। छल-छद्म-वैमनस्य सब, घर-घर बसते आज। शहरों से भी हो गए, खतरनाक अब गाँव।। रोटी ही जिसका खुदा, उसको क्या आराम। भूख से जब व्याकुल हुए, भूलते धूप-छाँव।। पूजा तेरे रूप की, करता मैं दिन-रात। पागल मन को प्यार में, मिलता मरहम-घाव।। मानव का है एक सच, बाकी सारा रोग। फिर भी इस संसार में, मन का नहीं लगाव।। **** केशव…

"पूजा तेरे रूप की"