मेरे बाबूजी

खंभा दीवार नींव थे घर के मेरे बाबूजी रूप थे हुनर के। उनमे थी सबको मिलाने की चाहत मरी धरती को जीलाने की चाहत दीदी की आशा भैया की उम्मीदें अम्मा की सजने-सजाने की चाहत, भीतर मोम मगर बाहर पत्थर थे।। गिनते न पैसा अतिथि के सम्मान में बड़ा सा मन था उस पतली सी जान में चाहता रहा मैं उन्हें जान पाऊँ पर कैसे घूमूँ पूरे आसमान में आधा साहस, आधा मेरा डर थे।।…

"मेरे बाबूजी"

वर्षों बाद भी ….

टूटते  हैं कई धागे नेह के हो के तार-तार। वर्षों बाद भी प्रिये हृदय से तू ही मेरा घर-द्वार। स्मृति तेरे दीप्त नयन की हर क्षण उद्वेलित कर जाती सच कहता सौगंध तेरी तू पल में विपदा हर जाती तूने सजा दी मेरी दुनिया चहूँ ओर बरसे प्यार। वर्षों बाद भी प्रिये हृदय से तू ही मेरा घर-द्वार। बंजर मन को स्नेह -उर्मि से सरस-सरल कर डाले तुम मीत! मिताई की मरहम से दूर किए…

"वर्षों बाद भी …."

हे माँ शारदे!

हे माँ शारदे! एक वर दे तू। अंध हृदय में ज्योति कर दे तू।। अगम अगोचर महिमा तेरी मैं खल कामी दुःख की ढेरी देरी करो ना विद्या दायिनी दुःख दरद सारी दर दे तू।। अमल कमल सा मेरा मन हो सहज सदाचारी जीवन हो मन हो कभी कलुष से आकुल कलुष सदा मेरा हर दे तू।। रस-छंद-बंधन मैं नहीं जानूँ तेरे समक्ष माता जिद्द ठानूं मानूँ कि कुछ अच्छा लिख लूँगा कल्पना का अक्षय…

"हे माँ शारदे!"

भारत देश महान

जिसके कण-कण बसा हुआ है ऋषि-मुनियों का ज्ञान वह है भारत देश महान वह है अपना देश महान। जड़-जंगम की महिमा न्यारी पूजी जाती हैं नदियाँ सारी पादप-पुहुप में प्रभु बसते हैं पाहन की प्रभुता है भारी जिसकी रक्षा में जन्मे यहाँ अनगिनत भगवान वह है भारत देश महान वह है अपना देश महान। भले उष्णता से तप्त धरा हो आसमान धरती पे गिरा हो ठण्ड गलाये अस्थि-पंजर को उदधि लाख लहरों से भरा हो…

"भारत देश महान"

मोहे दरश करा दो मोहन

मोहे दरश करा दो मोहन। निज प्रतिबिम्ब दिखा दो प्यारे, मेरे मन के मुकुरन।। मोहे दरश करा दो मोहन। मेरे मन के प्रेम लहर में अंग-अंग डूब जाये तुम ही कहो जग याद करूँ कैसे, जो तू ही रूठ जाये श्याम-सलोने सुरतिया पर, वारूँ शत-शत जीवन।। मोहे दरश करा दो मोहन। कर कृपा मुझपर हे मालिक एक दिन मेरी सुधि ले लो दया-दृष्टि देकर दुःख दर दो, ऐसे ना आस से खेलो दरश को तरसे…

"मोहे दरश करा दो मोहन"

देश का फ़ौजी

रोटी-सोटी, चाय-चपाती ये बड़े-बड़ों का खाना है, अपने लिए तो जल्दी से मैग्गी-सैगी बनवाना है। गार्डेन में जा कर मैं झूमूँ और झूला-झूलूँ खूब चॉकलेट-टॉफी ऐसे खाता कि नाक भी जाता डूब। मैं हूँ बच्चा, मन का सच्चा नहीं किसी से बैर। माँ-पापा की उँगली थाम के करना चाहूँ हरदम सैर। मम्मी का राजदुलारा हूँ सबके आँखों का तारा हूँ। सब कहते हैं जैसा भी हूँ मैं ही सबसे प्यारा हूँ। लाल-क़िले पर जाऊँगा मैं…

"देश का फ़ौजी"

बाल-दिवस की शुभकामना

बाल-दिवस पर बाल मन को कर लें कुछ वाचाल। मन की बातें करें पुरानी बिना बजाए गाल। चाचा जी से चूरन ले लें चकमा दे दें चाची को, माँ की गोद-गलीचा बैठ दूर करें सारी उदासी को। पापा संग जा उछलें-कूदें सैर करें हम दुनिया की, इस गोली में रस कैसे आया ऑपरेशन करें बुनिया की। जाकर लेमचूस खरीदेंगे काका के दूकान की, जो हम बच्चों को कहते हैं सूरत हैं भगवान की। बाल-दिवस पर…

"बाल-दिवस की शुभकामना"

जीवन आज भी है संघर्ष

आँख में आँसू मीठे-खारे जीवन में अवमूल्यन सारे नहीं हो सकते आदर्श जीवन आज भी है संघर्ष। संझा मैली गठरी लेकर पीर के आंगन आती है मेहनत से खा-पीकर फिर भी कुछ तो बचा के लाती है बैठ मुंडेरे चिंतित पाँखी कल क्या होगा गुन रही और चकोरी चाँद मिलन को तड़प-तड़पकर गाती है चैन की वंशी सुख का सितारा रोटी के आगे सब है बिसारा भुला मन हँसी-खुशी अमर्ष। जगह-जगह है गंगा ठहरी मार…

"जीवन आज भी है संघर्ष"

तपन बिन सूरज हुआ अधीर

तपन बिन सूरज हुआ अधीर।। हवा बावली शीत लहर सी वसनहीन पर टूटी कहर सी अलाव ठोंके ताल खैनी का बनकर कुशासन का नज़ीर।। कथा कहता कौआ सच्चा ज़िद्द पर बैठा पूरब बच्चा रवि-फल का सब बाट अगोरे ओढ़े घने कोहरे का चीर।। साँस को रोके सिसके कुँआ साँस से निकले मुँह भर धुँआ मूली-मिर्च के सउना-गंध से दोपहरी बन बैठी गंभीर।। कारण बिन कोई कार्य न होए सांध्य-सुबह सब मिलकर रोए सद्भाव बने सब…

"तपन बिन सूरज हुआ अधीर"

मुबारक हो सबको नया साल

अधर पर रहे अक्षय मुस्कान नयन में चहक भरा हो बिहान रहे न अब कोई खस्ता हाल। मुबारक हो सबको नया साल।। रोटी हो सबको उपलब्ध हृदय सबका सबसे संबद्ध प्रीति की सरिता सभी बहायें सभी से विनती करूँ करबद्ध द्वेष हिंसा है नहीं निदान करें सब इसका मिल समाधान नहीं हो किसी से किसी को मलाल। मुबारक हो सबको नया साल।। ऊर्वरा बढ़े धरती का रोज सभी रहें उत्सुक देने को भोज हो कैसे…

"मुबारक हो सबको नया साल"