चींटी रानी

चींटी रानी- चींटी रानी भोली भाली बड़ी सयानी छोटे-छोटे कदमों वाली रंग-रूप में छोटी-काली चलती जाती मिलजुल कर बिना डरे, होके बेफिकर चलना ही उसकी कहानी है चलने से ही तो ज़िंदगानी है — केशव मोहन पाण्डेय

"चींटी रानी"

देश का फ़ौजी

रोटी-सोटी, चाय-चपाती ये बड़े-बड़ों का खाना है, अपने लिए तो जल्दी से मैग्गी-सैगी बनवाना है। गार्डेन में जा कर मैं झूमूँ और झूला-झूलूँ खूब चॉकलेट-टॉफी ऐसे खाता कि नाक भी जाता डूब। मैं हूँ बच्चा, मन का सच्चा नहीं किसी से बैर। माँ-पापा की उँगली थाम के करना चाहूँ हरदम सैर। मम्मी का राजदुलारा हूँ सबके आँखों का तारा हूँ। सब कहते हैं जैसा भी हूँ मैं ही सबसे प्यारा हूँ। लाल-क़िले पर जाऊँगा मैं…

"देश का फ़ौजी"